{#2021} Karma Quotes In Hindi By Krishna – Krishna Quotes On Karma

आप सभी का हमारी पोस्ट पर स्वागत है आज यह पोस्ट Karma Quotes के ऊपर लिखी है, जिसमें Bhagwan Shree Krishna के द्वारा कर्म के ऊपर भगवत गीता में जो बातें बताई गयी थी, उन्हीं सुविचारों को हमने आज की पोस्ट में आपके साथ साझा किया है !

कर्मा कोट्स पर आधारित यह इस लेख में हमने केवल भगवान श्री कृष्ण के द्वारा कहे गए Bhagavad Gita Quotes को ही शामिल किया है, जो हमे कर्म और उससे जुड़े परिणामों के बारे में बताते है, मुझे उम्मीद है आपको यह पोस्ट जरूर पसंद आएगी !

Karma Quotes In Hindi By Krishna

Karma Quotes In Hindi By Krishna (1)

फल की अभिलाषा छोड़कर कर्म करने वाला पुरुष ही
अपने जीवन को सफल बनाता है !

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कर्म का फल व्यक्ति को उसी तरह ढूंढ लेता है
जैसे कोई बछड़ा सैकड़ो गायो के बीच अपनी मां को ढूंढ लेता है !

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बुरे कर्म करने नही पड़ते है हो जाते है
और अच्छे कर्म होते नही करने पड़ते है !

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कोई भी इंसान जन्म से नहीं
बल्कि अपने कर्मो से महान बनता है !

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अच्छे कर्म करने के बावजूद भी लोग केवल आपकी बुराइयाँ ही याद रखेंगे,
इसलिए लोग क्या कहते है इस पर ध्यान मत दो, तुम अपना काम करते रहो !

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कर्म ही धर्म का दर्शन है !

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हे अर्जुन,
बुद्धिमान व्यक्ति को समाज कल्याण के लिए
बिना आसक्ति के काम करना चाहिए !

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श्रेष्ठ पुरूष को सदैव अपने पद और गरिमा के अनुसार कार्य करने चाहिए
क्योकि श्रेष्ठ पुरूष जैसा व्यवहार करेंगे,
तो इन्ही आदर्शो के अनुरूप सामान्य पुरूष भी वैसा ही व्यवहार करेंगे !

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अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है !

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कर्मो से डरिये ईश्वर से नही
ईश्वर माफ कर देता है कर्म नही !

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कर्म से ही विजय है भाग्य भी कर्म पर निर्भर है
कर्म है तो सफलता तय है !

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बुरे कर्म करने वाले, सबसे नीच व्यक्ति जो राक्षसी प्रवित्तियो से जुड़े हुए है
और जिनकी बुद्धि माया ने हर ली है वो मेरी पूजा या मुझे पाने का प्रयास नही करते !

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मनुष्य को परिणाम की चिंता किए बिना
लोभ- लालच और निस्वार्थ और निष्पक्ष होकर
अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए !

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Krishna Quotes On Karma In Hindi

Karma Quotes In Hindi By Krishna (2)

ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप मे देखता है
वही सही मायने मे देखता है !

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जब इंसान अपने काम में आनंद खोज लेते हैं
तब वे पूर्णता प्राप्त करते है !

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अपने कर्म पर अपना दिल लगाये, ना की उसके फल पर !

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मनुष्य को अपने धर्म अनुसार कर्म करना चाहिए
जैसे – विद्यार्थी का धर्म विद्या प्राप्त करना,
सैनिक का धर्म देश की रक्षा करना आदि !

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आत्म ज्ञान की तलवार से काटकर अपने हृदय के अज्ञान के संदेह अलग कर दो
अनुशासित रहो, उठो और कार्य करो !

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जो पुरूष मन से इन्द्रियो द्वारा कर्मयोग का आचरण करता है वही श्रेष्ठ है !

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वह जो अपने भीतर अपने स्वयं से खुश रहता है,
जिसके मनुष्य जीवन एक आत्मज्ञान है और जो अपने खुद से संतुष्ट है,
पूरी तरीके से तृप्त है उसके लिए जीवन मे कोई कर्म नही है !

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जो इस लोक मे अपने काम की सफलता की कामना रखते है
वे देवताओ का पूजन जरूर करते है !

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ऐसा कोई नही, जिसने भी इस संसार मे अच्छा कर्म किया हो
और उसका बुरा अंत हुआ है, चाहे इस काल मे हो या आने वाले काल मे !

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स्वार्थ से भरा हुआ कर्म इस दुनिया को कैद मे रख देगा,
अपने जीवन से स्वार्थ को दूर रखे, बिना किसी व्यक्तिगत लाभ के !

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कोई भी व्यक्ति जो चाहे बन सकता है,
यदि वह व्यक्ति एक विश्वास के साथ
इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करें !

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अपने अनिवार्य काम करो,
क्योकि वास्तव मे कार्म करना निष्क्रया से बेहतर है !

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मनुष्य की अपने कर्मो के संभावित से प्राप्त होने वाली विजय या पराज्य, लाभ या हानि,
प्रसन्ता या दुःख इत्यादि के बारे मे सोच कर चिंता से ग्रसित नही होना चाहिए !

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अंतिम शब्द: हमें उम्मीद है आपको यह पोस्ट पढ़कर अच्छा लगा होगा और आपको यह पोस्ट जरूर पसंद आयी होगी, इस पोस्ट को अंत तक पढ़ने के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया, जय श्री कृष्णा !